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हेमोडायलिसिस किसे कहते है?

एक व्यक्ति को किडनी से जुड़ी कई बीमारियाँ हो सकती है , जिनमे किडनी का खराब होना सबसे गंभीर होता है. क्रोनिक किडनी रोग यानि किडनी फेल्योर एक ऐसी बीमारी है जिसकी खबर व्यक्ति को उस समय लगती है जब उसकी किडनी 60 से 65 प्रतिशत तक खराब हो चुकी होती है , ऐसे में इससे निदान पाना काफी मुश्किल होता है. दरअसल , किडनी खराब होने में एक लम्बा समय लगता है जिसमे महीनों से लेकर वर्षों तक का समय लग सकता है , शायद इसी कारण क्रोनिक किडनी रोग को साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है. किडनी खराब होने की खबर पाते ही लोग अक्सर एलोपैथी उपचार का चयन करते है , लेकिन वर्तमान समय में एलोपैथी द्वारा खराब हुई किडनी को पुनः ठीक करना संभव नहीं है. एलोपैथी उपचार में किडनी फेल्योर से छुटकारा पाने के लिए डायलिसिस का सहारा लिया जाता है , जोकि किडनी को स्वस्थ करने की एक नाकाम कोशिश है. एलोपैथी उपचार में किडनी को ठीक करने का केवल एक ही उपचार मौजूद है “ डायलिसिस ”. डायलिसिस रक्त छानने की एक कृत्रिम क्रिया है , जो शरीर से अपशिष्ट उत्पादों और अन्य विषाक्त तत्वों शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। जो किडनी रोगी एलोपैथी उ...

Ayurveda, Homeopathy, and Allopathy: What should you choose?

The kidney is one of the chief organs and its failure can cease the functioning of some other related organs in the body. The kidney is said to be failed when it does not perform its function as it should. The term kidney failure enfolds many other problems related to the organ. Conditions that can end up causing kidney failure are-   A kidney is said to be failed when enough blood does not reach the organ for the filtration purpose.  Diseases like high blood pressure, diabetes, polycystic kidney disease, and glomerulonephritis can cause kidney failure.  The kidney can also fall in the danger of failure when there is any blockage or scar in the kidney tissues.  These ailments are needed to be controlled on time before it reaches the pinnacle of its damages. In this blog, we will read about many treatment methods of kidney failure and which is the most effective Ayurvedic treatment for kidney failure in humans.  ...

आलूबुखारा रखे रोग को दूर

लगभग टमाटर की तरह दिखाई देने वाला एक फल है " आलूबुख़ार " । अपने महरून राग के कारण यह टमाटर की भांति दिखाई देता है। खाने में स्वादिष्ट खट्टा - मीठा लगने वाला यह रेशेदार फल एक मौसमी फल है , जो गर्मियों के मौसम आता है। इसकी खेती भारत में कम की जाती है।   यह भारत में अफगनिस्तान आयात किया जाता है , क्यूंकि वह की जलवायु लगभग भारत की जलवायु जैसी ही है। यह रेशेदार फल जितना ही खट्टा - मीठा है उतना ही गुणकारी भी है , इसे खाने से हम कई रोगो को खुद से दूर रख सकते है।   क्या है आलूबुखारे में ? आलूबुखारा गुणों की खान है। इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते है। जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही उपयोगी है। कच्चे प्लम 87% पानी , 11% कार्बोहाइड्रेट , 1% प्रोटीन और 1% वसा ( टेबल ) से कम हैं। 100 ग्राम की मात्रा में , कच्चे प्लम 46 कैलोरी की आपूर्ति करते हैं और केवल विटामिन सी (12% दैनिक मूल्य ) का एक मध्यम स्रोत है , जिसमें महत्वपूर्ण सामग्री (...