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क्या एक किडनी पर आदमी जिंदा रह सकता है


यदि किसी भी व्यक्ति के शरीर में एक ही किडनी हो, तो यह स्वभाविक रूप से उस व्यक्ति को चिंता में डाल सकता है। इस विषय में लोगों के मन में उठने वाली शंकाओं का निवारण करते हुए उन्हें इस विषय से संबंधित गलतफहमी दूर करने और उचित मार्गदर्शन देने का प्रयास किया जाता है।  
आपने कई केसों में सुना होगा कि, कई बच्चे एक किडनी के साथ जन्म लेते हैं। इन बच्चों में दाईं किडनी तो होती है, लेकिन बाई किडनी नहीं होती है। इस स्थिति को रेनल एजेंसिस कहा जाता है। वैसे इस बात का पता तब तक नहीं चलता, जब तक व्यक्ति का एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड टेस्ट न किया जाएं। कई बार ऐसा भी होता है कि, बच्चे की दोनों किडनियां होती है। लेकिन काम सिर्फ एक करती है। इस स्थिति को डिस्प्लेसिया कहा जाता है। इसके अलावा जिन लोगों को जन्म के साथ ही एक किडनी होती है। उन्हें अधिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। यदि बड़े होने के बाद किसी वजह से व्यक्ति की एक किडनी निकालनी पड़ती है,

एक ही किडनी वाला व्यक्ति -

एक किडनी वाले व्यक्ति को कोई तकलीफ नहीं होती है, लेकिन इस प्रकार के व्यक्ति की तुलना बिना स्पेयर व्हील की गाड़ी के साथ की जाती है। मरीजों की एक मात्र काम करती है, अगर किसी वजह से किडनी को नुकसान पहुंचता है, तो दूसरी किडनी न होने की वजह से शरीर का काम पूरी तरह से रूक जाता है। यदि यह किडनी थोड़े समय के लिए काम न करें, तो शरीर पर इसके कई विपरीत असर होने लगते है, जो धीरे-धीरे प्राणघातक भी हो सकती है। ऐसे में व्यक्ति को तुरंत डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है। शरीर की आवश्यकताओं का सामना करने के लिए एक ही किडनी सामान्य किडनी से अधिक बड़ी और भारी हो सकती है। इस तरह किडनी की बढ़ी हुई किडनी को चोट लगने का अधिक खतरा रहता है।

एक किडनी वाले व्यक्तियों को जीवन में होने वाली तकलीफ -

एक किडनी वाले व्यक्ति के जीवन में मेहनत करने या सहवास में कोई परेशानी नहीं होती है। प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में दो किडनी होती है, लेकिन किडनी में इतनी कार्यक्षमता रहती है कि, वह शरीर का सारा जरूरी काम संपूर्ण रूप से अकेले कर सकती हैं। एक किडनी वाला व्यक्ति अपना जीवन लंबे समय तक सामान्य रूप से जीता है। उसे शरीर में एक किडनी होने का पता ज्यादातर आकस्मिक जांच के दौरान होता है। कुछ लोगों में जिनकी एक ही किडनी होती है, उनमें कभी-कभी इसके कारण कुछ दुष्प्रभाव जैसे- उच्च रक्तचाप और पेशाब में प्रोटीन का जाना आदि देखा गया है। किडनी के कार्यों में कमी होना बहुत कम है।

व्यक्ति की एकमात्र किडनी को नुकसान कब होती है?

·         मात्र एक किडनी के मूत्रमार्ग में स्टोन की वजह से अवरोध होना
·         पेट के किसी ऑपरेशन के समय किडनी में से यूरिन ले जाने वाली नली, मूत्रवाहिनी भूल से बांध दी गई हो
·         कुश्ती, मुक्केबाजी और कराटे, फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों के समय अचानक किडनी में चोट लगना
·         अधिकतर लोगों में जन्म से ही एक किडनी होती है

एक ही किडनी होने के क्या कारण हो सकते हैं?

·         जन्म से ही शरीर में एक किडनी का होना
·         ऑपरेशन द्वारा शरीर से एक किडनी निकाल दी गई हो। ऑपरेशन द्वारा एक किडनी निकालने का मुख्य कारण किडनी में स्टोन का होना, मवाद होना अथवा लंबे समय से मूत्रमार्ग में अवरोध के कारण एक किडनी का काम करना बंद कर देना और किडनी में कैंसर की गांठ हो सकती हैं।
·         किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों में नई लगाई गई एक ही किडनी काम करती है।

रक्तचाप को सामान्य रखें -

वैसे एक किडनी वाले व्यक्ति को रक्तचार की समस्या अधिक रहती है, इसलिए जो व्यक्ति एक किडनी पर जी रहे हैं, उन्हें अपने रक्तचाप पर नजर रखनी चाहिए। रक्तचाप की समस्या के लिए डॉक्टर से मिलने पर उन्हें, यह जरूर बताएं कि, आप एक किडनी पर जी रहे हैं।

भारी एक्सरसाइज और खेल खेलने से पहले डॉक्टर से सलाह लिजिए

जब हम एक्सरसाइज करते हैं, तो हमारे शरीर में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है और पसीना भी निकलता हैं। ऐसे कार्यों की वजह से किडनी का काम बढ़ जाता है। ऐसे में अगर एक किडनी वाले व्यक्ति ज्यादा देर तक व्यायाम करते हैं या खेल खेलते हैं, तो उन्हें कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसलिए अगर आप जिम जाते हैं या खेल में रूचि हैं तो आपको सबसे पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

किडनी फेल पर रखें इन संकेत पर नजर -

एक किडनी वाले व्यक्ति में कुछ विशेष परिस्थितियों में किडनी फेल्योर की आशंका हो सकती है, इसलिए इन व्यक्तियों को किडनी फेल्योर के लक्षणों पर नजर रखना बेहद जरूरी होता है। यह कुछ किडनी फेल्योर के निम्न लक्षण हो सकते हैं जैसे –
·         टखने या चेहरे पर सूजन 
·         यूरिनेशन की आदतें या रंग में बदलाव होना
·         जी मिचलाना या बार-बार उल्टी होना
·         खाने का स्वाद बदल जाना
·         उंगलियां या अंगूठा सुन्न होना
·         थकान होना

एक किडनी वाले लोगों को ध्यान देने वाली योग्य बाते हैं -

जिन लोगों की एक ही किडनी है उन्हें किसी भी प्रकार के उपचार या चिकित्सा की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन अकेली किडनी की रक्षा करने के लिए कुछ सावधानियां रखना बेहद जरूरी है।
·         अच्छे से पानी पीना चाहिए
·         किडनी में चोट लगने की संभावना वाले खेलों में भाग नहीं लेना चाहिए
·         यूरिन में इंफेक्शन तथा स्टोन होने पर तुरंत योग्य उपचार कराना चाहिए।
·         डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा ना लें
·         साल में एक बार डॉक्टर के पास जाकर अपना रक्तचाप की जांच जरूर करवानी चाहिए और डॉक्टर की दी गई सलाह के अनुसार, रक्त और यूरिन की जांच और किडनी की सोनोग्राफी की जांच करानी चाहिए।
·         किसी भी प्रकार के उपचार या ऑपरेशन कराने से पहले शरीर में एक ही किडनी है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
·         हाई ब्लड प्रेशर को सामान्य रखें, नियमित, कसरत, स्वस्थ और संतुलित आहार और दर्दनाक दवाइयों का परित्याग करना आवश्यक है, लेकिन यदि डॉक्टर ने सलाह दी है, तो हाई प्रोटीनयुक्त आहार से बचना चाहिए और नमक यानी सोडियम का कम सेवन करें।

एक किडनी वाले व्यक्ति कब करें डॉक्टर से संपर्क –

·         यूरिन का अचानक कम या पूरी तरह से बंद होना
·         बुखार
·         यूरिन में जलन या लाल यूरीन आना
·         एक किडनी जो बढ़ी हुई उस पर आकस्मित चोट लगना
·         दर्द के लिए दवा लेने की आवश्यकता होना
·         नैदानिक जांच के लिए एक्सरे का इस्तेमाल करने की आवश्यकता होना
·         एक किडनी वाले लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए, लेकिन उन्हें इसकी सतर्कता रखनी जरूरी है। 

एक किडनी वाले व्यक्ति रखें अपनी की किडनी का खास ध्यान -

आजकल की बिगड़ती लाइफस्टाइल और गलत खान-पान इसकी सबसे बड़ी वजह सामने आई है। शरीर से अपशिष्ट पदार्थो को बाहर निकालने की जिम्मेदारी किडनी की है और किडनी का ख्याल रखने की जिम्मेदारी हमारी होती है। हम रोज प्राकृतिक तरीकों को अपनाकर किडनै को स्वस्थ बनाए रख सकते हैं
·         पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं - पानी को योग्य पर्याप्त मात्रा में सेवन करने से आपकी किडनी से जुड़ी कई समस्याओं से बचा जा सकता है, इसलिए हर रोज 7 से 8 गिलास पानी पीना जरूरी होता है। अधिक पानी पीने से आपको पसीना और पेशाब अधिक आता है, जो कि टॉक्सिन्स की सफाई करता है।
·         कैफीन और एल्कोहल का सेवन न करें - किडनी के स्वास्थ्य के लिए एल्कोहल का सेवन करना बिल्कुल अच्छा नहीं होता है, इसलिए एल्कोहल का सेवन जितनी जल्दी हो सके, छोड़ दें। साथ ही कैफीन भी आपके स्वास्थ्य के लिए उचित तत्व नहीं हैं, इसलिए इसका सेवन सीमित ही करें।
·         प्रोटीन का सेवन कम करें - हाई प्रोटीन फूड्स आपकी किडनी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इनके सेवन से आपको किडनी से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए किडनी को डिटॉक्स करने के लिए अपनी डाइट में हाई प्रोटीन युक्त आहारों को शामिल न करें या नियंत्रित मात्रा में ही इनका सेवन करें।
·         एप्पल साइडर विनेगर - भोजन करने से पहले आधा कप पानी में 4 से 6 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर सेवन करें। एप्पल साइडर विनेगर में मौजूद एसिडिटी आपकी किडनी को डिटॉक्स करने में मदद करती है।
·         रोज योग करें - प्रतिदिन योग करने से आपका शरीर फीट रहता है और आप कई तरह की बीमारियों से बचे रहते हैं। किडनी को डिटॉक्स करने के लिए भी योग करना बेहद जरूरी है। योग करने से किडनी समेत आपके सभी अंगों तक ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
·         हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करें - हरी सब्जियां पोषण से भरपूर होती है। साथ ही इसके सेवन से आपके शरीर में ऑक्सलेट का स्तर कम होता है, क्योंकि हरी सब्जियों में मैग्नीशियम और कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। इससे आपको किडनी को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है।
·         ग्रीन टी पिएं - बाजार में किडनी साफ करने वाली चाय उपलब्ध है। इसका नियमित रूप से सेवन करना किडनी को ठीक करता है। नेटल चाय, डैनडेलियन चाय और तुलसी चाय यह कुछ ऑर्गेनिक चाय है, जो कि आपकी किडनी को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है। नियमित रूप से ग्रीन टी का सेवन शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर करने में मदद करती है। आप दिनभर में दो कप ग्रीन टी ले सकते हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह के अनुसार। 

एक किडनी वाले व्यक्ति का किडनी डिजीज के लिए आयुर्वेदिक उपचार

भारत एक ऐसा देश है जहां आयुर्वेद ने जन्म लिया था और आज भी इसके इस्तेमाल से कई गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है। यह बात सबने सुना होगा कि, आयुर्वेद के जरिए किसी भी बीमारी का इलाज निश्चित है उसी प्रकार कर्मा आयुर्वेदा की मदद से किसी भी प्रकार की किडनी की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यहां आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों की मदद से किडनी से जुडी समस्या का इलाज करते हैं। इनकी औषधि में शामिल है यह जड़ी-बूटियां जैसे – कासनी, हल्दी, गोखरू, अदरक, गोरखमुंडी, त्रिफला, वरूण, पलाश, पुनर्नवा और गुदुची आदि। इन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल खुद से इलाज के तौर पर न करें। किडनी से जुड़ी दिक्कतों के इलाज के लिए कर्मा आयुर्वेदा में डॉक्टर पुनीत धवन से संपर्क जरूर करें।
दिल्ली के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक किडनी उपचार केंद्र में से एक है कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल। यह अस्पताल सन् 1937 में धवन परिवार द्वारा स्थापित किया गया था और आज इसका संचालन डॉ. पुनीत धवन कर रहे हैं। यहां आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से किडनी के मरीजों का इलाज किया जाता है। डॉ. पुनीत धवन ने आयुर्वेद की मदद से 35 हजार से भी ज्यादा मरीजों का इलाज करके, उन्हें रोग से मुक्त किया है वो भी डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट के बिना। कर्मा आयुर्वेदा में आयुर्वेदिक उपचार के साथ आहार चार्ट और योग करने की सलाह दी जाती है जिससे रोगी जल्दी ही स्वस्थ हो सकें।
आयुर्वेद तन और मन के बीच का संतुलन बनाकर स्वास्थ्य में सुधार करता है। आयुर्वेद में न केवल उपचार होता है, लेकिन यह जीवन जीने का ऐसा तरीका सिखाता है, जिससे जीवन लंबा और खुशहाल होता है। आयुर्वेद के मुताबिक, शरीर में वात, पित्त और कफ जैसे तीनों मूल तत्वों के संतुलन से कोई भी बीमारी आप तक नहीं आ सकती है, लेकिन जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो बीमारी शरीर पर हावी होने लगती है और आयुर्वेद में इन्हीं तीनों का संतुलन बनाया जाता है। आयुर्वेद में प्रतिरोध क्षमता विकसित करने पर बल दिया जाता है, क्योंकि किसी भी प्रकार का रोग न हो। आयुर्वेद में विभिन्न रोगों के इलाज के लिए हर्बल उपचार, घरेलू उपचार का इस्तेमाल किया जाता है।   




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