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बादाम खाने के तरीके


हम बचपन से सुनते आ रहे हैं बादाम खाने से दिमागी शक्ति तेज होती है, क्योंकि बादाम में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। इसका सेवन एक हेल्दी और पोषक स्नैक के रूप में किया जा सकता है। बादाम में अच्छी मात्रा में प्लांट बेस्ट प्रोटीन होता है। बादाम में विटामिन ई, डायटरी फाइबर और मोनोअनसैचुरेटेड फैट भी होते हैं, जो शरीर के लिए आवश्यक होते है। बादाम का सेवन हमारे शरीर को कई मायनों में लाभ पहुंचाता है। लेकिन इन्हें खाने का सही तरीका भी आपको पता होना चाहिए, क्योंकि आप इनका अधिक लाभ ले सके। अधिकतर लोग इसका सेवन भिगोकर करते हैं, तो कुछ लोग इन्हें रोस्ट करके भी खाते हैं। इसलिए आज बात करेंगे बादाम खाने के क्या तरीके हैं?

सूखे बादाम – अधिकतर सूखे बादाम खाना पसंद करते हैं, इसलिए हम सबसे पहले इसी पर बात करेंगे। यदि आयुर्वेद में बात करें, तो सूखे बादाम ऊतकों की मरम्मत करता है और स्किन के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है।
भीगे बादाम – बादाम में कई तरह के विटामिन, मिनरल्स पाएं जाते हैं। इन सभी का पूरा फायदा मिले, इसलिए बादाम को रातभर भिगोकर रखना अच्छा माना जाता है। साथ ही बेहद कम लोग ही होंगे, जो खाली पेट सिर्फ बादाम खाते हैं। वैसे खाली पेट सूखे बादाम नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से पित्त बढ़ता है और पाचन संबंधी समस्याएं घेर लेती है।

बादाम खाने का सबसे सही तरीका –

बादान खाने का सही तरीका वहीं है जिसे आर पसंद करते हैं। आप इन्हें भिगोकर, रोस्ट करके या सादे तरीके से भी खा सकते हैं, लेकिन इऩकी मात्रा का ध्यान देना बेहद जरूरी है। दिनभर में मुट्टी भर ही बादाम खाएं। साथ ही बादाम के सेवन से हमारे शरीर को बहुत से फायदे होते हैं। यह शरीर में लिपोप्रोटीन के लेवल को कम करते हैं जो बैड कोलेस्ट्रॉल है। यह दिल के स्वास्थ्य को बेहतर करता है। वजन को नियंत्रित रखने के लिए भी बादाम का सेवन करना बेहतर है। यह बालों और स्किन के स्वास्थ्य को भी बेहतर करता है।

साथ ही बादाम को छिलके के साथ खाना अच्छा होता है, तो कुछ कहते हैं कि इसे भिगोने के बाद छिलका उतारकर ही खाना चाहिए। बादाम में पाएं जाने वाले पोषक तत्वों के बारे में जानते हैं, लेकिन बादाम के छिलके में रूकावट खड़ी करता है इसलिए कभी भी बादाम को छिलके के साथ न खाएं। बादाम को खाने का सही तरीका है कि इसे एक रात पहले पानी में भिगोकर रख दें, क्योंकि इससे बादाम का छिलका आसानी से उतर जाता है। बादाम खाने के तरीके के बाद इसे खाने का सही समय है कि इसका सेवन सुबह के समय करें।

भिगे हुए बादाम के फायदे –

·         बादाम भूख को दबाने का काम करता है, जिससे वजन कम करने में भी मदद मिलती है    
·         दिल के लिए फायदेमंद
·         गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छा है
·         गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत के लिए अच्छा है
लेकिन अगर आप किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं या उसके लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूरी लें। साथ ही जान लें कि, किडनी की बीमारी क्या है और उसके संकेत कैसे नजर आते हैं।

किडनी की बीमारी -  

किडनी में गड़बड़ी का कोई एक वजह नहीं हैं जिसे दोष दिया जो सके, इसके लिए बहुत ऐसी वजह जिम्मेदार हैं। किडनी की बीमारी के लिए दूषित खान-पान और वातावरण को मुख्य कारण माना जाता हैं। गंदा मांस, मछली, अंडा, फल, भोजन और गंदे पानी का सेवन किडनी की बीमारी कारण बन सकता हैं। बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और वाहनों के कारण पर्यावरण प्रदूषण बढ गया हैं। भोजन और पेय पदार्थों में भी कीटाणुनाशकों, रासायनिक खादों, डिटरजेंट, साबुत, औद्योगिक रसायनों के अंश पाएं जाते हैं। ऐसे में फेफड़े और जिगर के साथ ही किडनी भी सुरक्षित नहीं हैं। किडनी के मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ रही हैं।

किडनी की बीमारी के लक्षण -

·         चेहरे और पैरों में सूजन आना
·         भूख कम लगना
·         बार-बार उल्टी होना
·         कमजोरी लगना
·         थकान
·         एनीमिया (शरीर में रक्त की कमी)
·         उच्च रक्तचाप
·         डायबिटीज का सही इलाज न होना  

किडनी की बीमारी में अपनाएं आयुर्वेदिक उपचार –

दुनिया में अधिकतर लोग एलोपैथी दवाओं पर भरोसा करते हैं और एलोपैथी में किडनी की बीमारी का कोई सफल इलाज नहीं है। जब किडनी की बीमारी गंभीर रूप ले लेती है, तो तब एलोपैथी डॉक्टर उन्हें डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह देते हैं, लेकिन आयुर्वेद एकमात्र ऐसा उपचार है, जिसमें इन दर्दभरी प्रक्रियाओं के बिना किडनी का इलाज किया जाता है। इनता ही नहीं, जो व्यक्ति डायलिसिस पर है उन्हें भी इससे मुक्ति मिल जाती है। आज भी इसके इस्तेमाल से कई गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है। यह बात सबने सुनी होगी कि, आयुर्वेद के जरिए किसी भी बीमारी का इलाज निश्चित है उसी प्रकार कर्मा आयुर्वेदा की आयुर्वेदिक दवाओं की मदद से किसी भी किडनी की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यहां आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों की मदद से किडनी से जुडी समस्या का इलाज करते हैं। इन औषधि में शामिल है यह जड़ी-बूटियां जैसे कि, कासनी, गोखरू, अदरक, गोरखमुंडी, त्रिफला, वरूण, पलाश, पुनर्नवा और गुदुची आदि। इन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल खुद से इलाज के तौर पर न करें। किडनी से जुड़ी दिक्कतों के इलाज के लिए कर्मा आयुर्वेदा में डॉक्टर पुनीत धवन से संपर्क जरूर करें। कर्मा आयुर्वेदा भारत का एकमात्र आयुर्वेदिक उपचार केंद्र है। यहां सिर्फ आयुर्वेदिक उपचार और आहार चार्ट की मदद से किडनी मरीज को रोग मुक्त किया जाता है।

कर्मा आयुर्वेदा दिल्ली के बेस्ट किडनी फेल्योर आयुर्वेदिक उपचार केंद्रो में से एक है, जो सन् 1937 में धवन परिवार द्वारा दिल्ली में स्थापित किया गया था और आज इस अस्पताल का नेतृत्व डॉ. पुनीत धवन कर रहे हैं। डॉ. पुनीत धवन ने आयुर्वेद की मदद से 35 हजार से भी ज्यादा मरीजों का इलाज करके उन्हें रोग से मुक्त किया है, वो भी बिना किसी डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट के। साथ ही कर्मा आयुर्वेदा का नाम भारत के साथ-साथ एशिया के बेहतरीन आयुर्वेदिक उपचार केंद्रो में शामिल है।


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