किडनी से जुड़ी हुई वैसे तो बहुत सी समस्याएँ हैं, जैसे – किडनी स्टोन,
फेल्योर, यूरिन, इन्फेक्शन आदि। किडनी से जुड़ी हुई सबसे गंभीर समस्याओं में किडनी
कि विफलता को सबसे गंबीर माना जाता है, लेकिन अगर हम बात करें किडनी कैंसर की तो
यह किडनी फेल्योर से कहीं अधिक गंभीर स्थिति है. वैसे तो किडनी कैंसर खुद में ही
एक गंबीर बीमारी है, लेकिन इस बीमारी से जुड़ी सबसे चीज़ कि बात करे तो वो है इसकी
पहचान. किडनी स्टोन को छोड़ दे तो किडनी से जुड़ी हुई अन्य समस्याओं कि पहचान करना
करना काफी मुश्किल होता है, जिसमे किडनी कैंसर भी सम्मिलित हैं. क्योंकि किडनी की
समस्याओं से जुड़े सभी लक्षण आम से होते हैं, इसके चलते किडनी समस्या कि पहचान करना
मुश्किल होता है. आज इस लेख में हम किडनी कैंसर कि पहचान कैसे की जा सकती है इस
बारे में बात करेंगे.
किडनी कैंसर में दिखाई देते हैं यह लक्षण :-
जब किसी व्यक्ति को कोई
बीमारी होती है तो उसके होने पर कई लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन किडनी में कैंसर
होने के शुरूआती समय में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन पेशाब से जुड़ी कोई
समस्या हो सकती है। लेकिन लेकिन जैसे-जैसे ट्यूमर का आकर बड़ा होने लगता है
वैसे-वैसे इसके लक्षण सामने दिखाई देने लग जाते हैं। किडनी में कैंसर होने पर
निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं :-
·
मूत्र में रक्त
आना,
·
शरीर में एक तरफ
या पेट में गांठ होना,
·
भूख न लगना,
·
पेट में एक तरफ असहनीय
दर्द होना और लंबे समय तक ठीक न होना,
·
अचानक वजन बढ़ना
और लगातार बढ़ते रहना,
·
ठंड या किसी अन्य
किसी संक्रमण के बिना ही एक सप्ताह या उससे अधिक समय तक बुखार
·
अत्यधिक थकान
होना और कुछ भी करने से आराम ना मिलना,
·
एनीमिया की
समस्या होना,
·
एड़ियों, पैरों और
आँखों के आस-पास में सूजन आना,
जब कैंसर किडनी के अलावा उससे बाहर फैलने लगता है तो उसके
लक्षण निम्नलिखित है :
·
श्वास फूलना,
·
खांसी के दौरान
खून आना,
·
हड्डियों में
दर्द या कमजोर होना या फिर दोनों का होना।
किडनी के कैंसर की जांच किस-किस प्रकार की जा सकती है?
अगर किसी व्यक्ति को यह
शंका हो कि उसको किडनी से जुड़ा कैंसर है तो वह सबसे पहले इसके लक्षणों की पहचान
करे। एक बार लक्षणों की पहचान होने के बाद व्यक्ति निम्नलिखित जांचों के माध्यम से
इस बात की पुष्टि कर सकता है :-
इन्ट्रावेनस पाइलोग्राम - इन्ट्रावेनस पाइलोग्राम, यह जांच किडनी का एक्सरे करती है। यह
जांच किडनी के कैंसर का पता लगाने में और आस-पास में किडनी में हुई क्षति का पता
लगाने में हमारी सहयता करती है। इस जांच को करने के दौरान वेन्स नसों में एक डाई
का इंजेक्शन लगाया जाता है, जिससे डाई किडनी में इकट्ठा हो जाता है और
यूरीन के साथ निकला दिया जाता है। यह डाई यूरीन के रास्ते को एक्स रे करती है।
अल्ट्रा साउंड - अल्ट्रा साउंड बहुत ही आम जांच हैं, यह मुख्य रूप से पेट से
जुड़ी समस्याओं का पता लगाने के लिए की जाता है। इस जांच द्वारा ध्वनि तरंगों की
मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि किडनी में मैजूद गांठ नान कैंसर है या
फ्लुइड फिल्ड सिस्ट है या कैंसर ट्यूमर है।
चेस्ट की जांच द्वारा - चेस्ट के एक्स रे और फेफड़ो के सिटी स्कैन द्वारा किडनी के
कैंसर की जांच द्वारा पुष्टि की जा सकती है। इन दोनों जांचों से इस बात की पुष्टि
हो जाती है कि किडनी का कैंसर फेफड़ो तक फैला हुआ है या चेस्ट के आसपास की हड्डियों
तक फैला हुआ है। अगर कैंसर चेस्ट तक फ़ैल चूका है तो कितना और कौन सी स्टेज पर है?
यूरीन एनालीसिस - पेशाब की जांच से पुरे शरीर की स्थिति कि जांच की जा सकती
है। यूरीन की रासायनिक जांच और माइक्रोस्कोरपिक जांच से रक्त की उस छोटी मात्रा की
जांच करते हैं, जो कि आखों से नहीं दिखते हैं। रेनल सेल
कार्सिनोमा के किडनी कैंसर से जूझने वाले लगभग 50 प्रतिशत मरीजों को हीमैटोयूरिया
की समस्या से जूझना पड़ता है। हीमैटोयूरिया में यूरीन में रक्त आने लगता है।
हड्डियों का स्कैन - हड्डियों की जांच इस जांच द्वारा छोटे और सुरक्षित स्तर के
रेडियोएक्टिव सामान से कैंसर की जांच कि जाती है कि कैंसर हड्डियों तक फैला या
नहीं।
रक्त जांच - किडनी से जुड़ी समस्या होने की आशंका होने पर रक्त जांच द्वारा शरीर में
अपशिष्ट उत्पादों की गणना की जा सकती है। एक पूर्ण रक्त गणना यह पता चलता है यहां
बहुत कम रेड ब्लड सेल है या बहुत अधिक रेड ब्लड सेल (पालीसिथीमिया) है।
कर्मा आयुर्वेदा द्वारा किडनी फेल्योर का आयुर्वेदिक उपचार
:-
कर्मा आयुर्वेद पूर्णतः
प्राचीन भारतीय आयुर्वेद के सहारे से किडनी फेल्योर का इलाज कर रहा है। कर्मा
आयुर्वेदा साल 1937 से किडनी रोगियों
का इलाज करते आ रहे हैं। वर्ष 1937 में धवन परिवार
द्वारा कर्मा आयुर्वेद की स्थापना की गयी थी। वर्तमान समय में डॉ. पुनीत धवन कर्मा
आयुर्वेदा को संभाल रहे है। डॉ. पुनीत धवन ने
केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर में किडनी की बीमारी से ग्रस्त
मरीजों का इलाज आयुर्वेद द्वारा किया है। डॉ. पुनीत धवन ने 35 हजार से भी ज्यादा किडनी मरीजों को रोग से
मुक्त किया हैं, वो भी डायलिसिस
या किडनी ट्रांसप्लांट के बिना।
Ayurvedic medicine for chronic kidney disease