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जाने काजू खाने से क्या नुकसान होते हैं?


जब हम ड्राईफ्रूट्स की बात करते हैं तो सबसे पहले काजू का नाम आता है, क्योंकि काजू को ड्राईफ्रूट्स का राजा कहा जाता है। भारत की अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरह से इसका इस्तेमाल किया जाता है। जी हां, इसका कहीं मीठे पकवानो, तो कहीं मसालेदार व्यंजनों में करते हैं। इतना ही नहीं, काजू का उपयोग सिर्फ खाने में ही नहीं, बल्कि कई शारीरिक तौर पर होने वाली कई समस्याओं से निजात दिलाने के लिए किया जा सकता है।   

साथ ही काजू का सेवन करने से कई फायदे होते हैं। यदि हम थोड़े से भी काजू का सेवन कर लेते हैं तो शरीर में बहुत उर्जा मिलती है। बल्कि कई बीमारियां भी दूर होती है, लेकिन अधिक मात्रा में काजू कई प्रकार के नुकसान का कारण बन सकता है। 
काजू का इस्तेमाल – 
स्वाद और सेहत में भरपूर काजू का इस्तेमाल आप कई प्रकार से कर सकते हैं जैसे कि –
आज काजू को जब मन करें सीधे खा सकते हैं
काजू कतली जैसी मिठाइयों में इसका इस्तेमाल होता है
काजू को बादाम के साथ भून कर, इसमें थोड़ा सा भी नमक मिलाकर स्नैक्स के रूप में खा सकते हैं
काजू को खीर और हल्वे में टॉपिंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं
आप दिनभर में 6 से 7 काजू खा सकते हैं, लेकिन फिर भी आप अपने आहार विशेषज्ञ से जरूर बात करें। 
काजू किन लोगों को नहीं खाना चाहिए – 
काजू हर किसी की सेहत पर अच्छा असर करें, क्योंकि कुछ लोगों के लिए यह हानिकारक साबित भी हो सकता है। 
कुछ लोगों को काजू के सेवन से एलर्जी हो सकती है, ऐसे में इससे दूरी बनाना ही उनके लिए ठीक रहेगा। 
काजू में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। फाइबर पेट को साफ करने का काम करता है, इसलिए जिन्हें दस्त की समस्या हो, उन्हें काजू नहीं खाने चाहिए। 
जहां एक ओर काजू स्वाद और सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, वहीं इसके कुछ नुकसान भी है। तो आइए हम काजू के नुकसान के बारे में बात करते हैं।
काजू खाने के नुकसान – 
वजन बढ़ना - काजू में कैलोरी की ज्यादा मात्रा की वजह से इसके अधिक सेवन से अनावश्यक वजन बढ़ने लगता है। लगभग 30 ग्राम काजू 163 कैलारी और 13.1 फैट होता है। इसमें पाए जाने वाला फैट स्वस्थ प्रकार का होता है, लेकिन इसको अधिक मात्रा में खाने से वजन बढने लगता। 
एलर्जी होना – काजू एलर्जी की समस्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। एक शोध के मुताबिक, एक परिवार के लगभग एक तिहाई बच्चों को एक साथ काजू से एलर्जी की समस्या हो गई थी। काजू खाने से एलर्जी कभी-कभी गंभीर रूप भी ले सकती है, इसलिए सांस लेने में कठिनाई, पित्ती, चकत्ते, खुजली, उल्टी या दस्त जैसे समस्या भी हो सकती है और ऐसा होने पर आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 
ब्लड प्रेशर की समस्या – वैसे तो नमकीन काजू आसानी से उपलब्ध होने वाला नाश्ते है और स्वाद भी ऐसा होता है कि लोग खाते ही रह जाएं। लेकिन फिर भी हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को इससे बचने की जरूरत है, क्योंकि इन नमकीन काजू में सोडियम का हाई लेवल होता है। जो ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है। 
सिरदर्द व माइग्रेन होना – यदि आपको सिर दर्द या माइग्रेन की समस्या है तो आपको काजू का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें अमीनो एसिड की अधिक मात्रा आपके सिर दर्द की बढ़ सकती है। 
डायबिटीज में नुकसान - अधिक मात्रा में काजू के सेवन से रक्त शर्करा के लेवल में वृद्धि होती है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों को इसके सेवन के समय अपनी रक्त शर्करा की निगरानी करनी चाहिए और इसके अनुसार आप अपनी डायबिटीज वाली दवाओं की खुराक को समायोजित करें। 
गॉलब्लैडर में स्टोन की समस्या – इन लोगों को काजू का बेहद अधिक सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद ऑक्सलेटेस तत्व किडनी या गॉलब्लैडर में स्टोन के गठन के साथ यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण हो सकता है। इसलिए गॉलब्लैडर से पीड़ित व्यक्ति को ध्यान में रखना चाहिए। 
गर्भावस्था में एलर्जी की समस्या – काजू विटामिन और मिनरल का एक समृद्ध स्त्रोत प्रदान करता है और गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक नाश्ते का एक अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन यदि आपको एलर्ज की समस्या है तो गर्भावस्था के समय खुद को और अपने होने वाले बच्चे को एलर्जी से बचाने के लिए काजू का सेवन बिल्कुल न करें। साथ ही गर्भवती महिलाओं को नमकीन काजू खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें सोडियम की हाई लेवल की वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
सर्जरी से पहले काजू का सेवन करें – काजू में रक्त शर्करा के लेवल को प्रभावित करता है, इसलिए कुछ मामलों में काजू सर्जरी के समय बाद रक्त शर्करा सामान्य में हस्तक्षेप करता है। ऐसे में अगर आप सर्जरी से पहले कम से कम 2 सप्ताह पहले काजू का अधिक सेवन बंद कर देना चाहिए।  
लेकिन अगर आप किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं तो काजू का सेवन करने से पहले अपने आहार विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। साथ ही किडनी की बीमारी को जानने के लिए नीचे दिए हुए लक्षणों से जान सकते हैं। 
शरीर में किडनी के मुख्य कार्य -
किडनी हमारे शरीर का अभिन्न अंग है इसके बिना हमारा शरीर कोई भी काम करने में असमर्थ रहता है। किडनी के बिना शरीर के काम करने की कल्पना करना भी असंभव है। किडनी हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ पेट के पिछले भाग में स्थित होती है। अगर किडनी के काम की बात की जाए तो मूल रूप से किडनी हमारे शरीर में उत्पन्न हुए जहर को बाहर निकालकर खून की सफाई का काम करती है यानि किडनी हमारे शरीर से क्षार (SALT) और एसिड को पेशाब के रूप में शरीर से बहार निकलती है। किडनी के इस कार्य से हमारे शरीर में संतुलन बना रहता है और बाकि सभी अंग अपना-अपना काम सुचारु रूप से कर पाते है। किडनी के कार्यों की बात करें तो आपको बता दें कि, किडनी का मुख्य कार्य खून की सफाई का होता है इसके अलावा किडनी हड्डियों को मजबूत करने का भी कार्य करती है।
किडनी की बीमारी के लक्षण - 
पेशाब का कम होना 
अधिक थकान रहना 
पेशाब में रक्त या झाग आना 
भूख कम लगना
चिड़चिड़ापन रहना 
एकाग्रता में कमी 
एनीमिया (शरीर में रक्त की कमी) 
कमजोरी रहना सांस लेने में दिक्कत होना 
मतली और उल्टी होना
सीने में दर्द होना
हाथ-पैर और टखने में सूजन आना
अधिक समस्या बढ़ने पर चेहरा सूज जाना
पीठ में दर्द होना 
अगर आपको अपने शरीर में कुछ इस तरह के संकेत नजर आते हैं, तो समझ जाइए कि आप किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं। साथ ही तुरंत इस बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज शुरू करें।  
किडनी की बीमारी के लिए आयुर्वेदिक उपचार केंद्र –
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां अपने सुंगंधित या औषधीय गुणों के लिए भोजन, स्वाद, दवा या सुगंध के लिए इस्तेमाल होती है। यह जड़ी-बूटियां पेड-पौधे के हरे पत्ते या फूलों वाले हिस्से को संदर्भित करती हैं, जबकि मसालें पौधो के अन्य भागों से बने होते हैं, जिसमें बीज, छोटे फल, जड़ और फल शामिल होते हैं। जड़ी-बूटियों के अनेक औषधीय व अध्यात्मिक इस्तेमाल होती हैं। यह जड़ी-बूटी के सामान्य इस्तेमाल पर पाक संबंधी जड़ी-बूटियां और औषधीय जड़ी-बूटियां और औषधीय जड़ी-बूटियां अलग है। 
आयुर्वेदिक उपचार में इस्तेमाल किए जाने वाली जड़ी-बूटियां -  
पुनर्नवा
कासनी 
शिरीष 
गुदुच
गोखरू
पलाश 
त्रिफला 
वरूण
आयुर्वेदिक उपचार एक प्राचीन पद्धति है, जिसका शब्दिक अर्थ है जीवन का विज्ञान है। मनुष्य के समग्रतावादी ज्ञान पर अधारित है। यह पद्धति मानवीय शरीर के उपचार तक ही सीमित रखने की बजाय, शरीर, तन-मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाकर स्वास्य्वि  में सुधार करता है। इस पद्धति की एक और उल्लेखनीय विशिष्टिता है। यह औषधीय गुण रखने वाली वनस्पतियों व जड़ी-बूटियों के जरीए बीमारियों का इलाज करती है। आयुर्वेद में निदान व उपचार से पहले मनुष्य के व्यक्तित्व की श्रेणी पर अधिक ध्यान दिया जाता है। आयुर्वेद में मुताबित, मानव शरीर चार मूल तत्वों से निर्मित है - दोष, धातू, मल और अग्नि। आयुर्वेद में शरीर की इन बुनियादी बातों का अत्यधिक महत्व है। इन्हें ‘मूल सिद्धांत’ या आयुर्वेदिक उपचार के बुनियादी सिद्धांत कहा जाता है।    
भारत का प्रसिद्ध किडनी उपचार केंद्र कर्मा आयुर्वेदा है, जहां किडनी की बीमारियों का आयुर्वेदिक इलाज किया जाता है। यह सन् 1937 में धवन परिवार द्वारा स्थापित किया गया था और आज इसका नेतृत्व डॉ. पुनीत धवन कर रहे हैं। कर्मा आयुर्वेदा में सिर्फ आयुर्वेदिक उपचार पर भरोसा किया जाता है। साथ ही डॉ. पुनीत धवन ने सफलतापूर्वक और आयुर्वेदिक उपचार की मदद से 35 हजार से भी ज्यादा मरीजों का इलाज करके उन्हें रोग मुक्त किया है, वो भी डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट के बिना। आयुर्वेदिक उपचार में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है जैसे पुनर्नवा, शिरीष, पलाश, कासनी, लाइसोरिस रूट और गोखरू आदि। यह जड़ी-बूटियां रोग को जड़ से खत्म करने में मदद करती हैं।  



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