किडनी इंफेक्शन एक विशिष्ट प्रकार का यूरिन ट्रेक इंफेक्शन (यूटीआई)
है, जो आमतौर पर आपके मूत्रमार्ग या
मूत्राशय से शुरू होता है और आपकी किडनी तक जाता है। किडनी इंफेक्शन के लिए तत्काल
चिकित्सा की आवश्यकता होती है। अगर ठीक तरह से इलाज नहीं किया जाए,
तो किडनी इंफेक्शन आपकी किडनी को स्थायी रूप से नुकसान पंहुचा सकते
हैं या बैक्टीरिया आपके रक्त में फैल सकते हैं। जिससे जानलेवा इंफेक्शन हो सकता
है। किडनी इंफेक्शन के इलाज पर एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल शामिल है और अक्सर
अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है।
किडनी इंफेक्शन के लक्षण –
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पेशाब में रक्त या प्रोटीन का आना
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भूख का कम लगाना या वजन घटना
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हाई ब्लड प्रेशर
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त्वचा पर रैशेज और खुजली होना
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थकान और सांस लेने में समस्या
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जी मिचलाना और चक्कर आना
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मांसपेशियों में ऐंठन
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बार-बार पेशाब आने का एहसास होना
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हाथ, पैर
और टखने में सूजन
किडनी इंफेक्शन के जोखिम कारक -
निम्नलिखित कारकों की वजह से किडनी इंफेक्शन के विकार का खतरा बढ़
जाता है –
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महिला - यह
आमतौर पर महिलाओं में देखा जाता है, क्योंकि
उनका पेशाबमार्ग योनि के करीब होता है। यह बैक्टीरिया के प्रवेश के लिए एक आसान
आधार बन जाता है। गर्भाव्स्था से किडनी में इंफेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
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पेशाब पथ में रूकावट -
पेशाब का कम प्रवाह या मूत्रशय के धीमी खाली होने से किडनी में इंफेक्शन का खतरा
बढ़ जाता है।
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कमजोरी प्रतिरक्षा प्रणाली - कुछ
चिकित्सा स्थितियां ऐसी है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है और शरीर को कई
समस्याओं जैसे मूत्राशय के इंफेक्शन, किडनी
के इंफेक्शन आदि के लिए कमजोर बना देती है।
किडनी इंफेक्शन के अन्य घरेलू नुस्खे -
आप या आपको कोई अपना किडनी इंफेक्शन जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है
तो आप निम्नलिखित घरेलू उपायों को अपना कर इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं –
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खूब पानी पिएं, जूस
पिए, छाछ लें। अधिक पये लेने से यूरिन की
मात्रा बढ़ेगी और जीवाणु यूरिन के साथ बाहर आ जाएंगे।
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दही के सेवन से करें,
यह आपकी किडनी के अच्छे और बुरे जीवाणुओं के बीच संतुलन बना कर रखता
है।
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नींबू पानी का सेवन करें,
यह इंफेक्शन के कारण होने वाली पीड़ा में राहत देता है।
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डॉक्टर की सलाह से एक गिलास में आधार
चम्मच बेंकिग सोडा दाल कर पिएं। यह न केवल किडनी इंफेक्शन को खत्म करने में मदद
करता है साथ ही उसे होने से भी रिक्त है।
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खाने में हल्दी का प्रयोग जरूर करें
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सेब के सिरके का सेवन करें,
आप सेब का सेवन भी कर सकते हैं। यदि आप सेब के सिरके का इस्तेमाल
करते हैं, इसे दिन में दो बार लें।
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अपने हर खाने में लहसून का इस्तेमाल
करें। आप लहसूस को कच्चा या अचार के रूप में ले सकते हैं।
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अदरक का इस्तेमाल करें। आप इसे चाय और
भोजन में डाल सकते हैं।
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रोज सुबह खाली पेट दो चम्मच एलोवेरा
जूस का सेवन कर सकते हैं।
किडनी इंफेक्शन की जांच -
लक्षणों के बारे में पता करने के बाद, आपको
यूरिन जांच करवानी चाहिए –
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यूरिन में रक्त,
मवाद और बैक्टीरिया की जांच के लिए यूरिन विश्लेषण
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बैक्टीरिया के प्रकार को देखने के लिए
यूरिन कल्चर जांच
डॉक्टर इन जांच का उपयोग करते हैं
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अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन - यूरिन
पथ में रूकावट की जांच के लिए आमतौर पर अल्ट्रासाउंड टेस्ट या सीटी स्कैन किया
जाता है। अगर उपचार पहले 3 दिनों में काम नहीं करता है।
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वायडिंग सिस्टोस्टोयुरेथ्रोग्राम - पेशाब
मार्ग और मूत्राशय में समस्याओं के निदान के लिए वीसीयूजी एक्स-रे का एक प्रकार
है। इन्हें अक्सर उन बच्चों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें
वेसिकुरेटेरल रिफ्लक्स है।
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डिजिटल रेक्टल जांच - इस
जांच में आपके डॉक्टर प्रोस्टेट की सूजन की जांच करने के लिए किडनी में उंगली
डालकर जांच करते है।
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डाइमरकैपसोसकसीनिक एसिड सिनटिग्राफी - यह
एक प्रकार का इमेजिंग टेस्ट है जो किडनी इंफेक्शन और नुकसान को बेहतर देखने के लिए
रेडियोधर्मी सामग्री का इस्तेमाल करते हैं।
किडनी इंफेक्शन में अपनाएं आयुर्वेदिक उपचार -
आयुर्वेद के अनुसार, कोई
भी रोग केवल शारीरिक अथवा मानसिक नहीं हो सकता है। शारीरिक रोगों का प्रभाव शरीर
पर पड़ता है और मानसिक रोगों का प्रभाव मन पर पड़ता है। इसलिए सभी रोगों को मनो –
दैहिक मानते हुए चिकित्सा की जाती है। इसमें किसी भी प्रकार के
रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसलिए इन औषधियों से हमारे शरीर
पर किसी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। आयुर्वेद में रोग प्रतिरोध
क्षमता विकसित करने पर बल दिया जाता हैं, क्योंकि
इससे किसी भी प्रकार का रोग न हो। आयुर्वेद और योग से असाध्य रोगों का सफल उपचार
किया जाता है। वह रोग भी ठीक हो सकता है जिनका अन्य चिकित्सा पद्धतियों में कोई
उपचार संभव नहीं है।
किडनी रोग की समस्या अधिक बढ़ती जा रही है और एलोपैथी में इस बीमारी
का कोई सफल इलाज मौजूद नहीं है। एलोपैथी उपचार में कहा जाता है कि क्रिएटिनिन कभी
कम नहीं होगा, बल्कि बढ़ता ही रहेगा। फिर डायलिसिस या
किडनी ट्रांसप्लांट करवाना पड़ेगा। लेकिन ऐसी नहीं है कर्मा आयुर्वेदा में हजारो
बार सिद्ध किया है कि आयुर्वेदिक की मदद से और बिना डायलिसिस या किडनी
ट्रांसप्लांट के क्रिएटिनिन को कम किया जा सकता है। साथ ही कर्मा आयुर्वेदा से
किडनी की बीमारी के लिए आयुर्वेदिक उपचार को अपना सकते हैं। यहां सर्वश्रेष्ट
आयुर्वेदाचार्य किडनी मरीजों को आयुर्वेदिक दवाओं के साथ आहार चार्ट लेने के लिए
सलाह भी देते हैं।