किडनी को साफ और स्वस्थ
रखने के लिए कई प्रकार हमारे बीच मौजूद है। आप अपनी किडनी को स्वस्थ रखने के लिए
बस कुछ खाद्य पदार्थों और जड़ी बूटियों को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं, जिनकी
मदद से आप बड़ी आसानी से अपनी किडनी को स्वस्थ रख सकते हैं। आज इस आलेख में हम इसी
विषय में बात करेंगे। आयुर्वेद में शुरुआत से ही किडनी की सफाई के लिए जड़ी बूटियों
का प्रयोग किया जाता रहा है, जो की व्यक्ति के शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं
डालती। इनमे कुछ जड़ी बूटी है जिन्हें चाय या काढ़े के रूप में लिया जाता है और कुछ
खाद्य उत्पाद हैं जिन्हें आहार के रूप में अपने खाने में शामिल किया जा सकता है।
जावा चाय :
जावा चाय, एक प्रकार की
हर्बल चाय यानि ग्रीन टी के रूप में पी जाती है। अध्ययनों में पाया गया कि यह रक्त
में यूरिक एसिड को कम करता है। रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक होने के कारण
व्यक्ति को गठिया जैसी दर्दनाक स्थिति का समाना करना पड़ सकता है। गठिया किडनी की
कार्यक्षमता में आई कमी के कारण बढ़ता है, जिससे पैरों में सूजन देखि जा सकती है।
इसके अलवा यह चाय पेट को स्वस्थ रखने, कोलेस्ट्रॉल कम करने, रक्त शर्करा को
संतुलित रखने में मदद करता है यह प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट है।
ब्राह्मी :
ब्राह्मी को वाटर हाइसॉप
भी कहा जाता है। इस जड़ी बूटी का प्रयोग आयुर्वेद में कई रोगों से निवारण के लिए
किया जाता है। यह कोशिकाओं पर ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है, और विशेष रूप से रक्त शर्करा,
यूरिक एसिड के स्तर और
रक्त लिपिड स्तर को संतुलित करके किडनी की रक्षा करता है। ब्राह्मी मस्तिष्क में
रक्त के प्रवाह को भी बढाने में मदद करती है। आप इसकी चाय को सप्ताह में दो बार पि
सकते हैं।
उवा उर्सि :
यह कम-बढ़ती सदाबहार जड़ी
बूटी, जिसे भालू का पत्ता (आर्कटोस्टाफिलोस यूवा-इरसी) के नाम से
भी जाना जाता है। इस जड़ी बूटी का प्रयोग आयुर्वेद में मूत्र पथ से जुडी समस्याओं
से निदान पाने के लिए किया जाता है। अगर आप मूत्र पथ से जुडी किसी भी समस्या से
जुझ रहें हैं तो आपको इसके काढ़े का सेवन जरूर करना चाहिए, लेकिन सप्ताह में केवल
दो से तीन दिन तक के लिए ही। उवा उर्सि पेशाब को बढ़ाकर पोटेशियम के स्तर को कम
करने में मदद करता है। ध्यान दें, यह एक मूत्रवर्धक औषधि के रूप में काम करती है,
जिसके कारण आपको कई बार पेशाब आ सकता है।
घोड़े की पूंछ
(हॉर्सटेल (इक्विटम अरविन्से) :
घोड़े की पूंछ एक ऐसी जड़ी
बूटी है जो कि दलदल में उगती है, इसी कारण इसे दलदली पौधे के नाम से भी जाना जाता
है। यह किडनी को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह से कार्य करती है। यह आयुर्वेदिक औषधि
मूत्रवर्धक, हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड के रूप में कार्य करती
है। हॉर्सटेल न केवल किडनी को साफ करने का काम करता है, बल्कि यह लीवर की रक्षा करने में भी मदद करता है। इसका सेवन सप्ताह में कुछ दो
से तीन बार ही करें।
भुट्टे के रेशे :
कच्चे भुट्टों को छिलते
समय उसके अंदर से काफी मात्रा में रेशे निकलते हैं, जिसे हम अक्सर निकाल कर
अलग फेंक देते हैं। लेकिन भुट्टे के वह रेशे काफू फायदेमंद औषधि होती है, यह किडनी को साफ करने में आपकी काफी सहायता करते हैं। किडनी को साफ करने के
लिए आप इन रेशों को घर में छावं में सुखा लीजिये। अच्छे से सूखने के बाद आप इसे 50
ग्राम की मात्रा में लें और इसे दो गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो
उसका सेवन करें, आप इसका स्वाद बढ़ने के लिए इसमें नींबू, नमक या हल्की सी चीनी डाल सकते हैं।
इसका नियमित सेवन करने से
आपकी किडनी की कार्यक्षमता काफी बढ़ने लगेगी, साथ ही आपको किडनी स्टोन, मूत्र संक्रमण, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, रक्त शोधन और बढ़ते वजन से भी राहत मिलेगी। आप इस पेय का सेवन महीने में एक बार
या दो बार कर सकते हैं। इसका सेवन करने के बाद आपको सामान्य से ज्यादा पेशाब आ
सकता है, जोकि सामान्य बात है। इसका सेवन करने के दौरान आप अधिक मीठा, डिब्बाबंद खाना, मांसाहार, शराब आदि का सेवन ना करे।
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